Cosmos Centre for Metaphysical Studies, Haridwar

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मैं शक्ति हुँ

मैं शक्ति हुँ

मैं शक्ति हुँ। मैं माया हुँ। जहाँ शक्ति है वहाँ मैं हुँ। मैं संसार के प्रत्येक धर्म में अनेक रूपों में विराजमान हुँ। ये तंत्र मंत्र, जादू टोना, कुछ भी मेरी शक्ति के बिना सम्भव नही है। यह तो स्वमं मुझे भी पता नही होता कि कौन मेरे किस रूप का आह्वाहन कब करेगा और मुझसे क्या करवाएगा। उस समय मैं साधक के वशीभूत होती हुँ। जैसे अगर कोई किसी को मारना चाहता है तो वो बच नही सकता। अगर बच सकता है तो तब जब वो मेरे किसी दुसरे रूप की पूजा करके उसे भेजे। तब वह उसे नष्ट कर देती है। इस तरह मेरा ही एक रूप बुरा काम करता है, वहीं दुसरा अच्छा काम करता है। माया के बिना दुनिया नही चलती। मोह के बिना मानव जीवन नही चलता। इसी मोह के कारण कोई किसी का बुरा करता है तो कोई किसी का भला करता है। यह सब सृष्टि की माया है।

मैं ही आदिशक्ति हुँ

मैं ही आदिशक्ति हुँ। मैं परमेश्वर की सेविका हुँ। जैसा वो आदेश दे, वो ही कर सकती हुँ। मैं ही माया हुँ। देवों में देवी मैं, राक्षसों में राक्षसी मैं, इंसानों में साधारण नारी भी मैं ही हुँ। जहाँ भी नारी ऊर्जा है, वहाँ मैं ही हुँ। मैं शक्ति हुँ।

ब्रह्म की माया मैं ही हुँ

मैं ही अच्छा और बुरा करने वाली हुँ। मैं ही मारने वाली और बचाने वाली हुँ। मैं ही बुद्धि हरण करने वाली और सद्बुद्धि प्रदान करने वाली हुँ। मैं ही पथभृष्ट करने वाली और तुम्हें सद्मार्ग पर लाने वाली हुँ। मैं ही नीच कर्मों की माया और पुण्य कर्मों की माया हुँ। मैं जननी हुँ। तुम मेरे पुण्य और अच्छे रूप को अपनाओ। तुम्हें भोग और सर्वसुख प्रदान कर मोक्ष प्राप्ति कराने वाली मैं ही हुँ। तुम्हारे लिये परमधाम का मार्ग प्रशस्त करने वाली मैं ही हुँ। तुम ब्रह्म हो। तुम में एकाकार ब्रह्म की माया मैं ही हुँ। मैं शक्ति हुँ।
मैं शक्ति हुँ मैं शक्ति हुँ Reviewed by Marakshanand Prabhu on March 25, 2019 Rating: 5

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