Saturday, 19 November 2016

Guru Gorakhnath Sarbhanga (Janjira) Mantra

गुरु गोरखनाथ का सरभंगा (जञ्जीरा) मन्त्र 

“ॐ गुरुजी में सरभंगी सबका संगी, दूध-मास का इक-रणगी, अमर में एक तमर दरसे, तमर में एक झाँई, झाँई में परछाई दरसे, वहाँ दरसे मेरा साँई। मूल चक्र सर-भंग आसन, कुण सर-भंग से न्यारा है, वाँहि मेरा श्याम विराजे। ब्रह्म तन्त से न्यारा है, औघड़ का चेला-फिरुँ अकेला, कभी न शीश नावाऊँगा, पुत्र-पूर परत्रन्तर पूरुँ, ना कोई भ्रान्त ल्लावूँगा, अजर-बजर का गोला गेरूँ परवत पहाड़ उठाऊँगा, नाभी डंका करो सनेवा, राखो पूर्ण बरसता मेवा, जोगी जुग से न्यारा है, जुग से कुदरत है न्यारी, सिद्धाँ की मुँछयाँ पकड़ो, गाड़ देओ धरणी माँही, बावन भैरुँ, चौंसठ जोगन, उलटा चक्र चलावे वाणी, पेडू में अटके नाड़ा, ना कोई माँगे हजरत भाड़ा, मैं भटियारी आग लगा दियूँ, चोरी चकारी बीज मारी, सात राँड दासी म्हारी, वाना-धारी कर उपकारी, कर उपकार चल्यावूँगा, सीवो दावो ताप तिजारी, तोडूँ तीजी ताली, खट-चक्र का जड़ दूँ ताला, कदेई ना निकले गोरख बाला, डाकिनी शाकिनी, भूताँ जा का करस्यूँ जूता, राजा पकडूँ, हाकिम का मुँह कर दूँ काला, नौ गज पाछे ठेलूँगा, कुँएं पर चादर घालूँ गहरा, मण्ड मसाणा, धुनी धुकाऊँ नगर बुलाऊँ डेरा। यह सरभंग का देह, आप ही कर्ता, आपकी देह, सरभंग का जाप सम्पूर्ण सही, सन्त की गद्दी बैठ के गुरु गोरखनाथ जी कही।” 


विधिः- किसी एकान्त स्थान में धूनी जलाकर उसमें एक चिमटा गाड़ दें। उस धूनी में एक रोटी पकाकर पहले उसे चिमटे पर रखें। इसके बाद किसी काले कुत्ते को खिला दें। धूनी के पास ही पूर्व तरफ मुख करके आसन बिछाकर बैठ जाएँ तथा २१ बार उक्त मन्त्र का जप करें। उक्त क्रिया २१ दिन तक करने से मन्त्र सिद्ध हो जाता है। सिद्ध होने पर ३ काली मिर्चों पर मन्त्र को सात बार पढ़कर किसी ज्वर-ग्रस्त रोगी को दिया जाए, तो आरोग्य-लाभ होता है। भूत-प्रेत, डाकिनी, शाकिनी, नजर झपाटा होने पर सात बार मन्त्र से झाड़ने पर लाभ मिलता है। कचहरी में जाना हो, तो मन्त्र का ३ बार जप करके जाएँ। इससे वहाँ का कार्य सिद्ध होगा।

Saturday, 18 June 2016

Powerful Mahalaxmi Yantra

आवश्यक सामग्री.
भोजपत्र 
अष्टगंध
कुमकुम.
चांदी की लेखनी, चांदी के छोटे से तार से भी लिख सकते हैं। 

उचित आकार का एक ताबीज जिसमे यह यंत्र रख कर आप पहन सकें। दीपावली की रात या किसी भी अमावस्या की रात को कर सकते हैं। 

विधि विधान :-
  
धुप अगर बत्ती जला दें। संभव हो तो घी का दीपक जलाएं। स्नान कर के बिना किसी वस्त्र का स्पर्श किये पूजा स्थल पर बिना किसी आसन के जमीन पर बैठें। अघोर अवस्था में इस यन्त्र का निर्माण अष्टगंध से भोजपत्र पर करें। इस प्रकार 108 बार श्रीं [लक्ष्मी बीज मंत्र] लिखें। हर मन्त्र लेखन के साथ मन्त्र का जाप भी मन में करतेरहें। यंत्र लिख लेने के बाद 108 माला " ॐ श्रीं ॐ " मंत्र का जाप यंत्र के सामने करें। एक माला पूर्ण हो जाने पर एक श्रीं के ऊपर कुमकुम की एक बिंदी लगा दें। इस प्रकार १०८ माला जाप जाप पूरा होते तक हर "श्रीं"  पर बिंदी लग जाएगी। जाप पूरा हो जाने के बाद इस यंत्र को ताबीज में डाल कर गले में धारण कर लें। कोशिश यह करें की इसे न उतारें।  उतारते ही इसका प्रभाव समाप्त हो जायेगा। यह शक्तिशाली महालक्ष्मी यंत्र है और आर्थिक अनुकूलता प्रदान करता है। 

Vashikaran

Vashikaran means to control someone. So, vashikaran is used to control someone. It is used the most in Shat-Karma. The life of human beings is based on love and emotions. This is Love-illusion which makes one to do Good or Bad to others. Vashikaran is used the most by lovers to get themselves as husband and wife. At present, people also use it to get into a relationship with someone before or after marriage. It is used all over the world for different purposes or aspects. It is advised to use it for divinity or in the interest of humanity.

वशीकरण का अर्थ है "वश में करना"। किसी को अपने वश में करने के लिए वशीकरण का प्रयोग किया जाता है। षटकर्मों में वशीकरण का ही प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। मानव जीवन मोह माया पर आधारित होता है। इसी मोह के कारण कोई किसी का बुरा करता है तो कोई किसी का भला करता है। प्रेमी-प्रेमिका अपने प्रेम को पति-पत्नी के रूप में पाने के लिये वशीकरण का सबसे ज्यादा प्रयोग करते है। आजकल लोग इसका प्रयोग विवाह-पुर्व या विवाह के उपरान्त किसी से सम्बन्ध बनाने के लिए भी करने लगे है। दुनिया के लगभग सभी देशों में अलग-अलग तरिके से लोग इसका प्रयोग करते है या कराते है। 

navnath shabar mantra

Navnath Shabar Mantra to fulfill your all divine wishes. You will get eternal peace by chanting these mantras. The Navnath will look at you and lead you towards salvation. 

नवनाथ शाबर मन्त्र
“ॐ गुरुजी, सत नमः आदेश। गुरुजी को आदेश। ॐकारे शिव-रुपी, मध्याह्ने हंस-रुपी, सन्ध्यायां साधु-रुपी। हंस, परमहंस दो अक्षर। गुरु तो गोरक्ष, काया तो गायत्री। ॐ ब्रह्म, सोऽहं शक्ति, शून्य माता, अवगत पिता, विहंगम जात, अभय पन्थ, सूक्ष्म-वेद, असंख्य शाखा, अनन्त प्रवर, निरञ्जन गोत्र, त्रिकुटी क्षेत्र, जुगति जोग, जल-स्वरुप रुद्र-वर्ण। सर्व-देव ध्यायते। आए श्री शम्भु-जति गुरु गोरखनाथ। ॐ सोऽहं तत्पुरुषाय विद्महे शिव गोरक्षाय धीमहि तन्नो गोरक्षः प्रचोदयात्। ॐ इतना गोरख-गायत्री-जाप सम्पूर्ण भया। गंगा गोदावरी त्र्यम्बक-क्षेत्र कोलाञ्चल अनुपान शिला पर सिद्धासन बैठ। नव-नाथ, चौरासी सिद्ध, अनन्त-कोटि-सिद्ध-मध्ये श्री शम्भु-जति गुरु गोरखनाथजी कथ पढ़, जप के सुनाया। सिद्धो गुरुवरो, आदेश-आदेश।।”

नवनाथ-स्तुति
“आदि-नाथ कैलाश-निवासी, उदय-नाथ काटै जम-फाँसी। सत्य-नाथ सारनी सन्त भाखै, सन्तोष-नाथ सदा सन्तन की राखै। कन्थडी-नाथ सदा सुख-दाई, अञ्चति अचम्भे-नाथ सहाई। ज्ञान-पारखी सिद्ध चौरङ्गी, मत्स्येन्द्र-नाथ दादा बहुरङ्गी। गोरख-नाथ सकल घट-व्यापी, काटै कलि-मल, तारै भव-पीरा। नव-नाथों के नाम सुमिरिए, तनिक भस्मी ले मस्तक धरिए। रोग-शोक-दारिद नशावै, निर्मल देह परम सुख पावै। भूत-प्रेत-भय-भञ्जना, नव-नाथों का नाम। सेवक सुमरे चन्द्र-नाथ, पूर्ण होंय सब काम।।” 
विधिः- प्रतिदिन नव-नाथों का पूजन कर उक्त स्तुति का २१ बार पाठ कर मस्तक पर भस्म लगाए। इससे नवनाथों की कृपा मिलती है। साथ ही सब प्रकार के भय-पीड़ा, रोग-दोष, भूत-प्रेत-बाधा दूर होकर मनोकामना, सुख-सम्पत्ति आदि अभीष्ट कार्य सिद्ध होते हैं। २१ दिनों तक, २१ बार पाठ करने से सिद्धि होती है।

नवनाथ-शाबर-मन्त्र
“ॐ नमो आदेश गुरु की। ॐकारे आदि-नाथ, उदय-नाथ पार्वती। सत्य-नाथ ब्रह्मा। सन्तोष-नाथ विष्णुः, अचल अचम्भे-नाथ। गज-बेली गज-कन्थडि-नाथ, ज्ञान-पारखी चौरङ्गी-नाथ। माया-रुपी मच्छेन्द्र-नाथ, जति-गुरु है गोरख-नाथ। घट-घट पिण्डे व्यापी, नाथ सदा रहें सहाई। नवनाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई। ॐ नमो आदेश गुरु की।।”

विधिः- पूर्णमासी से जप प्रारम्भ करे। जप के पूर्व चावल की नौ ढेरियाँ बनाकर उन पर ९ सुपारियाँ मौली बाँधकर नवनाथों के प्रतीक-रुप में रखकर उनका षोडशोपचार-पूजन करे। तब गुरु, गणेश और इष्ट का स्मरण कर आह्वान करे। फिर मन्त्र-जप करे। प्रतिदिन नियत समय और निश्चित संख्या में जप करे। ब्रह्मचर्य से रहे, अन्य के हाथों का भोजन या अन्य खाद्य-वस्तुएँ ग्रहण न करे। स्वपाकी रहे। इस साधना से नवनाथों की कृपा से साधक धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। उनकी कृपा से ऐहिक और पारलौकिक-सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
विशेषः-’शाबर-पद्धति’ से इस मन्त्र को यदि ‘उज्जैन’ की ‘भर्तृहरि-गुफा’ में बैठकर ९ हजार या ९ लाख की संख्या में जप लें, तो परम-सिद्धि मिलती है और नौ-नाथ प्रत्यक्ष दर्शन देकर अभीष्ट वरदान देते हैं।


नव-नाथ-स्मरण
“आदि-नाथ ओ स्वरुप, उदय-नाथ उमा-महि-रुप। जल-रुपी ब्रह्मा सत-नाथ, रवि-रुप विष्णु सन्तोष-नाथ। हस्ती-रुप गनेश भतीजै, ताकु कन्थड-नाथ कही जै। माया-रुपी मछिन्दर-नाथ, चन्द-रुप चौरङ्गी-नाथ। शेष-रुप अचम्भे-नाथ, वायु-रुपी गुरु गोरख-नाथ। घट-घट-व्यापक घट का राव, अमी महा-रस स्त्रवती खाव। ॐ नमो नव-नाथ-गण, चौरासी गोमेश। आदि-नाथ आदि-पुरुष, शिव गोरख आदेश। ॐ श्री नव-नाथाय नमः।।”

विधिः- उक्त स्मरण का पाठ प्रतिदिन करे। इससे पापों का क्षय होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुख-सम्पत्ति-वैभव से साधक परिपूर्ण हो जाता है। २१ दिनों तक २१ पाठ करने से इसकी सिद्धि होती है।

इस साधना को किसी भी जाति, वर्ण, आयु का पुरुष या स्त्री कर सकती है। इन मन्त्रों की साधना में गुरु की इतनी आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि इनके प्रवर्तक स्वयं सिद्ध साधक रहे हैं। इतने पर भी कोई निष्ठावान् साधक गुरु बन जाए, तो कोई आपत्ति नहीं क्योंकि किसी होनेवाले विक्षेप से वह बचा सकता है। साधना करते समय किसी भी रंग की धुली हुई धोती पहनी जा सकती है तथा किसी भी रंग का आसन उपयोग में लिया जा सकता है। साधना में जब तक मन्त्र-जप चले घी या मीठे तेल का दीपक प्रज्वलित रखना चाहिए। एक ही दीपक के सामने कई मन्त्रों की साधना की जा सकती है। अगरबत्ती या धूप किसी भी प्रकार की प्रयुक्त हो सकती है, किन्तु शाबर-मन्त्र-साधना में गूगल तथा लोबान की अगरबत्ती या धूप की विशेष महत्ता मानी गई है। जहाँ ‘दिशा’ का निर्देश न हो, वहाँ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके साधना करनी चाहिए। मारण, उच्चाटन आदि दक्षिणाभिमुख होकर करें। मुसलमानी मन्त्रों की साधना पश्चिमाभिमुख होकर करें। जहाँ ‘माला’ का निर्देश न हो, वहाँ कोई भी ‘माला’ प्रयोग में ला सकते हैं। ‘रुद्राक्ष की माला सर्वोत्तम होती है। वैष्णव देवताओं के विषय में ‘तुलसी’ की माला तथा मुसलमानी मन्त्रों में ‘हकीक’ की माला प्रयोग करें। माला संस्कार आवश्यक नहीं है। एक ही माला पर कई मन्त्रों का जप किया जा सकता है। शाबर मन्त्रों की साधना में ग्रहण काल का अत्यधिक महत्त्व है। अपने सभी मन्त्रों से ग्रहण काल में कम से कम एक बार हवन अवश्य करना चाहिए। इससे वे जाग्रत रहते हैं। हवन के लिये मन्त्र के अन्त में ‘स्वाहा’ लगाने की आवश्यकता नहीं होती। जैसा भी मन्त्र हो, पढ़कर अन्त में आहुति दें। शाबर मन्त्रों पर पूर्ण श्रद्धा होनी आवश्यक है। अधूरा विश्वास या मन्त्रों पर अश्रद्धा होने पर फल नहीं मिलता। साधना काल में एक समय भोजन करें और ब्रह्मचर्य-पालन करें। मन्त्र-जप करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें। साधना दिन या रात्रि किसी भी समय कर सकते हैं। मन्त्र का जप जैसा-का-तैसा करं। उच्चारण शुद्ध रुप से होना चाहिए। साधना-काल में हजामत बनवा सकते हैं। अपने सभी कार्य-व्यापार या नौकरी आदि सम्पन्न कर सकते हैं। मन्त्र-जप घर में एकान्त कमरे में या मन्दिर में या नदी के तट- कहीं भी किया जा सकता है। ‘शाबर-मन्त्र’ की साधना यदि अधूरी छूट जाए या साधना में कोई कमी रह जाए, तो किसी प्रकार की हानि नहीं होती।



Thursday, 16 June 2016

Sarvkamna siddhi mantra

Sarvkamna siddhi mantra is the one and sure shot solution of your many problems. Use this mantra to bring peace and harmony in your life.
सर्वकामना सिद्धि मन्त्र 
१. ॐ पर मन्त्र पर यन्त्र बन्धय बन्धय मां रक्ष रक्ष हूं हूं हू स्वाहा । 
२. ॐ ठं ठ: परकृतान बन्धय बन्धय छेदय छेदय स्वाहा । 
३. ॐ क्रौं ह्रौं वैरिकृत विकृतम् नाशय नाशय उलटवेधं कुरु कुरु स्वाहा । 
४. ॐ  परकृतमभिचरं घातय घातय ठ: ठ: स्वाहा हुं । 
५. ॐ नमो ह्रौं पर विद्यां छिन्धि छिन्धि स्वाहा । 
६. ॐ शत्रु कृतान मन्त्र यंत्र तन्त्रान नाशय नाशय उद्बन्धय उद्बन्धय स्वाहा । 
७. ॐ नमः परमात्मने सर्वात्मने सर्वतो मां रक्ष रक्ष स्वाहा।
८. ॐ ॐ ॐ हुं हुं हुं अरिणा यत्कृतम् कर्म तत्तस्यैव भवतु इति रुद्रज्ञापयति स्वाहा फट। 

उपरोक्त आठों मंत्र कर्मबद्ध करके दिये गए हैं । ये स्वयं सिद्ध मन्त्र हैं । जिन लोगों  का कार्य नहीं चलता, रोज़ किसी ना किसी परेशानी का सामना करना पड़ता हो, व्यापार में रुकावट आ गयी हो या शत्रु-भय इत्यादि सब परेशानियों से मुक्ति दिलाने में ये मन्त्र बेहद लाभकारी है । नियमित कम से कम २१ बार जपने से सभी परेशानियां कुछ ही समय पश्चात् स्वतः दूर हो जाएंगी । मंत्र का जप प्रातः काल स्नान की बाद एकांत कक्ष में बैठकर करें । मंत्र से पहले और बाद में ॐ का ध्यान ज़रूर करें । जल्द सफ़ल होंगे ।    

Vidveshan Mantra

विद्वेषण मन्त्र (Vidveshan Mantra)
Vidveshan Mantra is used to create enmity between two or more individuals to make them apart and go away from each other. It is advised to use this kind of mantra to take your right when someone has snatched it. 

Om namoh adesh guru satya naam ko. Bara sarso tera raai. 
Baat ki mithi, masaan ki chhaai
patak marukar jalwar, amuk phute na dekhe amuk ka dwar
meri bhakti, guru ki shakti, phuro mantra ishwaro vacha.

(ॐ नमो आदेश गुरु सत्य नाम को। १२ सरसों १३ राई । 
बाट की मिठी, मसाण की छाई । 
पटक मारू कर जलवार । अमुक १ फूटे न देखे अमुक २ का द्वार । 
मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा । )

विधि : थोड़ी पीली सरसों, राई और मेथी, आम तथा ठाक वृक्ष की सुखी लकड़ी ले आएं और फिर शमशान में जाकर किसी चिता की राख ले आयें । एकत्रित लकड़ियों से हवन करें तथा शेष सामग्री को मिलाकर उक्त मन्त्र  को पढ़ते हुए १०८ आहुतियां दें । (अमुक १) तथा (अमुक २) के स्थान पर दोनों व्यक्तियों का नाम लें । शीघ्र वांछित परिणाम प्राप्त होगा ।  




Friday, 10 June 2016

Kamdev Vashikaran Mantra

Kamdev Vashikaran Mantra

Om namoh bhagwate kamdevay yashya yashya drishyo bhavami yashch yashch mam sukham pashyati tam tam mohyatu swaha.

ॐ नमोः भगवते कामदेवाय यश्य यश्य दृश्यो भवामि यश्च यश्च मं सुखं  पश्यति तं तं  मोहयतु स्वाहा । 

Guru Gorakhnath Sarbhanga (Janjira) Mantra

गुरु गोरखनाथ का सरभंगा (जञ्जीरा) मन्त्र  “ॐ गुरुजी में सरभंगी सबका संगी, दूध-मास का इक-रणगी, अमर में एक तमर दरसे, तमर में एक झाँई, झाँ...